My second s**

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कुछ समय बाद मैं छुट्टियों के लिए घर आया था। मैंने किसी को अपनी खोई हुई वर्जिनिटी के बारे में नहीं बताया। मुझे फिर से सेक्स करने का मूड हुआ।

किस्मत से मम्मी और पापा को 3 दिन के लिए किसी शादी फंक्शन में शहर के बाहर जाना पड़ा। उनके निकलने के बाद मैंने आॅन्लाईन रंडियाँ ढूँढी। किस्मत से मुझे वो रंडी दिखी जिसे मैंने कई महीनों पहले पेला था। मैं मौके को कैसे जाने देता? तुरंत उसे बुक कर लिया।

मैं पहले से उसके आने का वक्त जानता था। दरवाजा हल्का सा खुला रख कर छुप गया। उसके अंदर आते ही मैंने उस पर झडप मारी और खींचते हुए अपने बेडरूम ले गया और बेडरूम का दरवाजा बंद कर दिया। मैंने हवस भरी आवाज में पूछा, “पहचाना?”

वो बोली, “वही जो अपनी चड्डी से बहुत लगाव रखता है।”

अपनी टी-शर्ट और बनियान उतार फेंक मैं बोला, “हाँ।” और उसे होंठों पर चूमने लगा। लेकिन इस बार वो फायरब्रांड निकली। उसे पता था कि मुझे किस प्रकार का सेक्स पसंद है। उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया। उसने अपनी टी-शर्ट और स्कर्ट उतार फेंकी। अब वो ब्रा और पैंटीज़ में थी। वो नहीं जानती थी कि मैंनै अपने फोन को ऐसी जगह छुपा दिया था जहाँ से पूरा सेक्स रेकॉर्ड हो सके।

उसने हथकड़ियों से मेरे हाथ और पैर बिस्तर को बांध दिए। उसने अपने दांतों से मेरी जीन्स उतारी। अब मैं सिर्फ नेवी ब्लू सॉक्स और ग्रीन रंग की जॉकी की चड्डी में था। वो तुरंत बोली, “ये वो चड्डी नहीं है जो तुमने उस दिन पहनी थी। मुझे याद है क्योंकि उस दिन तुम्हारा लंड तुम्हारी चड्डी में नाच रहा था और तुम चड्डी उतारने में हिचकिचा रहे थे। वो चड्डी ब्लॅक थी। चड्डी नहीं, तुम्हारे लंड का पिंजरा है ये। लेकिन ये चड्डी भी बहुत सेक्सी चड्डी है।” वो बार बार “चड्डी” बोल रही थी क्योंकि वो जानती थी कि उससे मेरी गरमाहट बढ़ती है।

उसने मेरी हवस बढाना शुरु कर दिया। उसने मेरी चड्डी थोड़ी नीचे सरकाई, मेरे लंड पर कॉंडम चढाया और फिर से मुझे चड्डी पहना दी। अब वो मेरी चड्डी पर हाथ घुमाने लगी। मेरा लंड और कड़क हो गया था। फिर उसने मेरी चड्डी की बँड पर लिखे J-O-C-K-E-Y अक्षरों पर उँगली घुमाई। मेरी ठरक बहुत बढ गई थी और मैं हथकड़ियों से निकलना चाहता था। लेकिन उस रंड ने मेरी चड्डी नहीं उतारी। मेरा लंड तड़पता रहा और हद से ज्यादा दर्द कर रहा था। मेरी चड्डी के ऊपर से मेरे लंड को सहलाते और तड़पाते हुए वो मेरे होंठ चूमने लगी। मैं भी उसके होंठ चूमने में उसका साथ देने लगा, क्योंकि इतनी गरम लड़कियों को होंठों पर चूमना मुझे पसंद है। मैं चूमता रहा और मेरी चड्डी का तंबू बन चुका था। मेरा लंड मेरी चड्डी में नाच नाच कर बहुत दर्द कर रहा था लेकिन मैंने जितना हो सके उतना नज़रंदाज़ करके चूमना जारी रखा। वो मेरे ऊपर थी और मैं नीचे लेकिन शायद मेरे चूमने में ज़्यादा पॅशन था।

इसके बाद उसने कुछ नया किया। वो अपना सर मेरी चड्डी पर रख कर लेटी। सर रखते ही चड्डी में कैद मेरे लंड पर दबाव आने की वजह से लंड चड्डी में फुदकने लगा। ये महसूस करके वो हल्की सी हसी और उठी। फिर वो वापस मुझ पर चढ़ी।

कम से कम दस मिनट तक वो मेरे हवस की परीक्षा ले रही थी। वो हल्के से अपनी उँगली से मेरे लंड के टिप को ही मेरी चड्डी के ऊपर से सहलाने लगी। अब लंड चड्डी के अंदर बहुत जोरदार झटके दे रहा था। मैं हथकड़ियों से निकलने के लिए तड़प रहा था। मेरी चड्डी सच में लंड का पिंजरा बन गई थी।

वो वहीं नहीं रुकी। अब उसका हाथ मेरे गोटों के पास आ गया था। मुझे अचानक थोड़ा डर लगा, कयोंकि मुझे जी.बी. रोड़ याद आया। एक बार पेल कर मैंने उसे हवस के चलते फिर पेला था। वो छूटने की कोशिश करती रही लेकिन मैंने आखिर उसे फिरसे पेल दिया। जब मैं कपड़े पहन रहा था तब वो नंगी अवस्था में बेहोश पड़ी थी। मैं इतना निर्दयी था कि उसे कपड़े बिना पहनाए मैं चला गया। तब मैंने सोचा था कि वैसे भी कोई और इस रंडी को पेलने जरूर आने वाला होगा, तो नंगी ही पड़े रहने दो। मुझे डर था कि कहीं उस पुराने बात का बदला ये मेरे कंचे जोर से दबा कर न ले ले।

अजीब बात थी कि इस डर में भी मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था और मेरी चड्डी का तंबू बरकरार था। और वो भी सिर्फ हवस बढ़ाने के लिए ही मेरे कंचों को चड्डी के ऊपर से बहुत हल्के से दबा रही थी। वो मेरे लंड को चड्डी से छुड़ा ही नहीं रही थी। मैंने थोड़े गुस्से से कहा, “निकाल मुझे रंडी! फिर देखना!” वो मेरे पास आ कर बहुत सेक्सी अंदाज़ में बोली, “शांत! अभी नहीं। तुझे तेरी चड्डी बहुत पसंद है न? पहने रख! अभी और तड़पाऊँगी तुझे!”

उसने अपना हाथ सिर्फ मेरी चड्डी के पास नहीं रखा। मोजे़ और चड्डी के अलावा मैंने कुछ भी नहीं पहना था। उसने अपनी उंगलियों से मेरा पेट, नाभी और कमर सहलाए। साफ पता चल रहा था कि वो मुझे तड़पाना चाहती थी।

उसने अपने नाक की टिप को मेरे दोनों पैर और मेरी चड्डी के ऊपर से फेरा। उसके बाद वो अपनी उंगलियों से फिर मेरे लंड को मेरी चड्डी के ऊपर से सहलाने लगी। हवस तो मेरे अंदर जैसे बिना रुके बढ़ती ही जा रही थी।

चड्डी पर हाथ फेरते हुए वो फिर मुझे होंठों पर चूमने लगी। मेरी बढ़ती हवस ने मेरी साँसें तेज़ कर दी थी और इस बीच मैं भी उसे चूमने में उसका साथ देने लगा। यही मेरी कमज़ोरी थी। वो मेरे लंड को चड्डी में कैद रख के दिल खोल के तड़पा सकती थी, लेकिन अगर वो मेरे होंठ चूमने लगती तो मैं भी चूमता। होंठों पर चूमने में कुछ बात थी जो मुझे पसंद थी। कोई ऐसी बात जिससे मैं अपनी चड्डी में तंबू बनने के दर्द को नज़रंदाज़ करके इतने पॅशन से चूम सकता था।

बहुत वक्त बाद उसने मेरे हाथों को हथकड़ियों से छुड़ाया। मैंने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ी, अपनी ओर (नीचे) खींचा और बहुत पागलों की तरह खूब चूमने लगा। मेरे पैर बंधे थे लेकिन किसी तरह मैं पलट कर उसके ऊपर आ गया। मैंने उसे चूमते चूमते अपने पैरों से पूरी ताकत लगाई और पैरों की हथकड़ियाँ तोड़ दीं। मैं ज़रा भी नहीं रुका। मैंने इतने ज़ोर से उसकी पैंटी खींची कि उसकी पैंटी बुरी तरह फट गई। आखिरकार मैंने अपनी चड्डी नीचे सरकाई। मैं ठरक से इतना भर चुका था कि चड्डी पूरी उतारने तक रुक नहीं सका। चड्डी सिर्फ घुटनों तक सरकी थी लेकिन मैंने लंड घुसा कर उसे तेज़ी से पेलना शुरू किया। पेलते वक्त मैं बहुत पॅशन से उसकी ब्रा के ऊपर से उसके दूध दबा रहा था हम दोनों ही सेक्स करते हुए मज़े में चीख रहे थे और मेरा बिस्तर भी हिल हिल कर आवाज़ कर रहा था।

कुछ मिनटों बाद हम दोनों झड़ गए, और में उस पर गिर गया। मैंने काँडम उतार कर चड्डी पहन ली। इसके बाद भी मैंने उसे जाने नहीं दिया। मैंने उसे अगली सुबह तक घर पर ही रहने को कहा। मैंने उस पूरे दिन सिर्फ चड्डी पहने रखी और उसे सिर्फ ब्रा और स्कर्ट पहने रखने बोला। पैंटी का सवाल ही नहीं उठा क्योंकि वो फट चुकी थी।

मैं सामने वाले कमरे में सोफा पर लेट गया। एक ब्लू फिल्म लगाकर मैंने उसे अपने पास बुलाया। हमने घंटों तक खूब चुम्मा-चाटी की। मैंने उससे अपनी चड्डी पर पूरी उत्तेजना से हाथ फिरवाए और सख्त चेतावनी दी कि वो मेरी चड्डी ज़रा भी न उतारे। मैं भी उसके बदन पर हाथ फेरे और फिर उसकी जाँघों तक हाथ पहुँचाए। फिर वो मेरे ऊपर चढ़ी और अपनी स्कर्ट ऊपर करके मुझ पर ऐसे लेटी कि उसकी निचली नंगी गरमाहट अब मेरी चड्डी को छू रही थी। वो रगड़ने लगी। उसकी रगड़न के कारण मैं अपनी चड्डी में झड़ गया। वो भी झड़ गई और उसका पानी भी मेरी चड्डी पर गिरा।

रात को हमने ज़यादा नहीं खाया और तुरंत मेरे बेडरूम में सोने चले आए। मैं उसी भीगी हुई चड्डी में सो गया, और वो ब्रा और स्कर्ट मैं सो गई।

देर रात मैंने अपना लंड तना हुआ पाया। मेरी चड्डी काफी सूख चुकी थी लेकिन लंड को चिपकी हुई थी। और उस तने हुए लंड की वजह से मैं सो नहीं पाता। अब एक ही रास्ता था।

मैंने देखा कि वो रंडी सोई हुई थी। मैंने न आव देखा न ताव; बस चड्डी नीचे सरकाकर पूरा लंड एक झटके में उसके अंदर घुसा कर उसे बुरी तरह पेला। लंड अंदर घुसाते ही वो उठी और देखा कि मैं बेशर्मी से उसे पेल रहा था। उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की।

उसे पेलने के बाद मैं खुद को कमज़ोर और थका हुआ महसूस करने लगा। मैं चड्डी पहन कर सो गया।

अगली सुबह जब मैंने उसे पैसे देकर जाने कहा तब वो बोली, “तुमने तो मेरी पैंटी फाड़ दी। मुझे प्लीज़ अपनी कोई चड्डी दे दो।”

मैंने कहा, “कल तूने मुझे तड़पाया। आज तू तड़प। बिना अंदर कुछ पहने बाकी कपड़े पहन कर निकल। कोई चड्डी नहीं मिलेगी।”

मैंने उसके हाथ में मेरा काँडम ले जाने के लिए ज़यादा पैसे थमा दिए।

जब भी मैं हमारा रेकॉर्ड किया हुआ सेक्स टेप देखता हूँ, तब अपनी चड्डी का तंबू बना देख और चूमते वक्त उसको अपनी चड्डी पर हाथ फेरता देख मेरे पैंट में छटपटाहट शुरू हो जाती है।

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  • Wow I bet this is a great confession. Unfortunatelly I do not understand a damn thing you are writting.

  • I used google translate, it’s about some guy who has s** with a prostitue in his comfort of his home

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